हर मोड़ पर कुल्हड़ किंग का राज
हर गली के कोने पर एक चाय टपरी खड़ी मिल जाती है, और उसके साथ एक कुल्हड़ किंग भी। कोई अदरक कम रखता है, कोई चीनी ज़्यादा, पर म्हारे जयपुर में लोग इसी से पहचान बना लेते हैं। सुबह स्कूल वाले, दोपहर के ठेकेदार, शाम को कार्यालय से लौटे लोग — सब एक ही बेंच पर जम जाते हैं। असली बात चाय में कम, आदत में ज़्यादा होती है। जिस टपरी पर चाय थोड़ी कड़क, बर्तन साफ, और बोलने वाला सीधा हो, वही मोहल्ले का अड्डा बन जाता है। घणी देर तक बैठने का बहाना भी मिल जाता है, और नई खबर का पहला घूँट भी। जयपुर की टपरी बस चाय नहीं बेचती — वह अपने कुल्हड़ किंग के साथ मोहल्ले की धड़कन संभालती है।
