हवामहल वाली सेल्फी का पूरा तमाशा
हवामहल के सामने सुबह से ही कैमरे और गाड़ियों का छोटा-सा मेला लग जाता है। पर्यटक जाली को पृष्ठभूमि में रखकर मुद्रा जमाता है, और साथ खड़ा दोस्त बोलता रहता है—“थोड़ा और बाएँ, थोड़ा और ऊपर।” जयपुर की सड़क भी कमाल की है; एक तरफ घोड़ा, एक तरफ ऑटो, बीच में सेल्फी का यह पूरा राग। घणी मेहनत से जो सही फ्रेम बनता है, उसमें हवा से ज़्यादा लोग दिखते हैं। और सच्ची, सबसे बड़ी टक्कर यातायात से नहीं, उस पल से होती है जब कोई कह दे: “भाई, अब तो मेरा भी एक शॉट ले दे।”
