जयपुर का ऑटो मीटर: पूरा पौराणिक यंत्र
जयपुर के ऑटो में बैठो तो मीटर पहले देखता है, फिर चालक का चेहरा। मशीन सीधी खड़ी रहती है, पर उसकी चाल पर पूरा शहर शक करता है। कभी लगता है जैसे यह किसी पुरानी कथा का यंत्र हो, जो नंबर कम और हिम्मत ज़्यादा नापता है। कच्चे रास्ते, यातायात सिग्नल, और एमआई रोड की भीड़ में मीटर का ज्ञान अलग ही चलता है। चालक बोले, “साहब, इसने तो बस शुरुआत की है,” और सवारी सोच में पड़ जाए। जयपुर के लोग भी समझ गए हैं—मीटर का नाम सुनो, पर हिसाब आँखों से करो। घणी यादगार बात यह है कि इस शहर में मीटर से ज़्यादा मशहूर उस पर उठने वाला संदेह है.
