जयपुर का झरोखा: सड़क देखने का नया शौक
जयपुर की पुरानी हवेलियों में झरोखा बस बनावट का हिस्सा नहीं, रोज़ का नज़ारा है। दीवार से बाहर निकली हुई वह छोटी सी खिड़की घर को निजता देती है, और साथ ही गली का पूरा माहौल भी। ऊपर से औरत या घर के बड़े, बिना बाहर निकले, बाज़ार, पड़ोस और आते-जाते लोग देख लेते हैं। इसीलिए जयपुर में हवेली बनाते वक्त झरोखे का आकार, उसकी ऊँचाई और सामने का कोण सब सोच-समझ कर रखा जाता है। हवा भी आती है, धूप भी टूटती है, और नज़र भी बचती है। घणी सच्ची बात है — जयपुर वाले घर को बंद कम, देखने लायक ज़्यादा बनाना पसंद करते हैं। और जब झरोखे से सड़क सीधी दिखे, तब समझो हवेली ने अपनी पहचान पक्की कर ली.
