जयपुर का गुलाबी रंग, एक पेंट से पहचान
1876 में प्रिंस ऑफ़ वेल्स के आने पर जयपुर ने अपनी दीवारों को एक ही रंग से सँवारा था — हल्का गुलाबी। बस इतनी सी बात थी, पर उसने शहर की पहचान पकड़ ली। कचौरी की दुकान हो या हवा महल के पास की सड़क, गुलाबी रंग ने जयपुर को एक अलग ही चेहरा दे दिया। फिर यह रंग सिर्फ़ मेहमान के लिए नहीं रहा। बाद में व्यवस्था भी ऐसी बनी कि पुराने शहर में एक साथ एक जैसी छाया दिखे। घणी सच्ची बात, इससे शहर को एक साफ़-साफ़ पहचान मिल गई। आज भी जब कोई कहता है “पिंक सिटी”, तो मतलब सिर्फ़ रंग नहीं, एक आदत, एक याद, एक शहरी शान है।
