जयपुर के सर्कल का असली नियम
जयपुर के सर्कल पर यातायात का एक अलग ही हिसाब चलता है। अजमेरी गेट हो या जेएलएन मार्ग के बड़े गोल चक्कर, गाड़ी सीधी कम और नज़र ज़्यादा चलती है। यहाँ हॉर्न सिर्फ़ आवाज़ नहीं, एक छोटा सा संकेत है — “म्हारे को जगह दे।” असल नियम लिखे नहीं होते: जो पहले आँख मिलाए, वही पहले घुसे; जो ज़्यादा तेज़ हो, वही ज़रूर सही हो, ऐसा भी नहीं। कभी ऑटो किनारे हो जाता है, कभी बस अपनी लंबी साँस लेकर मुड़ती है, और कभी स्कूटर वाला बिल्कुल बेपरवाह निकल जाता है। जयपुर की सर्कल संस्कृति का राज़ यही है — थोड़ा सब्र, थोड़ी चालाकी, और घणी सी नज़र। बस इसी से यातायात भी चल जाता है, और बात भी.
