जयपुर के सर्कल में ये 3 बातें चलती हैं
जयपुर के राउंडअबाउट में गाड़ी चलाना बस स्टीयरिंग घुमाना नहीं होता, भाैसाब। पहले नंबर पर होती है नज़र: कौन अंदर आएगा, कौन पहले निकलेगा। फिर आता है धीरज—जो जल्दी में हॉर्न बजाता है, उसे आम तौर पर सबसे पहले रुकना पड़ता है। चेतक सर्कल हो या एम.आई. रोड का कोई व्यस्त गोला, यहाँ एक अनबोली रीत चलती है: जो अपनी लाइन समझे, वही आगे बढ़ता है। घणी बार लगता है सब बस बेतरतीब चल रहे हैं, पर जयपुर वाला चालक एक पल में पढ़ लेता है कि किसकी गाड़ी सीधी जाएगी और किसकी नज़र में ही गुस्सा है। इसी लिए सर्कल सिर्फ यातायात का गोल नहीं, शहर की आदत का छोटा सा इम्तिहान है।
