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जयपुर बोलेJaipur Bole

जयपुर की चाट गली और गोलगप्पों का रस्म

Jaipur ki chaat lane aur golgappe ka ritual

सूरज ढलते ही जयपुर की चाट गली में नई रौनक आ जाती है। ठेले पर सेव की खड़खड़, इमली की मीठी खुशबू और गरम टिक्कियों की भाप मिलकर शाम को खास बना देती है। यहाँ गोलगप्पे सिर्फ नाश्ते की चीज़ नहीं, एक छोटा सा रस्म हैं। पहले पानी का स्वाद चुना जाता है, फिर भरावन, फिर वह धीरे-धीरे बढ़ती गिनती। कोई छाती पर हाथ रखकर बोलता है, “बस पाँच और,” और कोई सीधे दस पर रुकता है। घणी जयपुर वाली बात यह है कि साथ बैठने का बहाना भी यहीं मिलता है। चाट गली की रोशनी, ठंडी हवा और एक प्लेट का साझा हिसाब—शाम को यादगार बना देते हैं।