जयपुर की डेस्टिनेशन वेडिंग: फेरे और पैसा
अजी, जयपुर की डेस्टिनेशन वेडिंग अब सिर्फ रंगीन तस्वीर नहीं, एक पूरी स्थानीय दौड़ है। सिटी पैलेस के पास हो या किसी हवेली के आँगन में, फेरे के साथ सजावट वाले, टेंट वाले, फूलों की मंडी, खानसामा और फोटो खींचने वाले सबका काम चल पड़ता है। एक शादी में घणी लोगों को रोज़गार मिल जाता है—यह बात जयपुर वाले अच्छी तरह समझते हैं। मोड़ यह है कि महल का आकर्षण मेहमान को खींचता है, पर खर्च शहर के छोटे-बड़े धंधे तक पहुँचता है। बैंड वाले से लेकर टैक्सी, धुलाई और मिठाई वाले तक सबका हिसाब बनता है। पधारो म्हारे देश का रंग यहीं दिखता है: शादी एक दिन की होती है, पर उसका असर कई दिन तक बाज़ार में घूमता रहता है। घणी बार जयपुर की खूबसूरती का मतलब सिर्फ़ फोटो नहीं, रोज़ी भी होता है।
