Jaipur Live
← Feed
जयपुर बोलेJaipur Bole

जयपुर की दुकानें अब भी पत्ते पर क्यों टिकी हैं

Jaipur ki dukaanein ab bhi patte par kyun tikki hain

ओल्ड सिटी की गलियों में दुकान का हिसाब कभी स्क्रीन पर इतना सुकून नहीं देता जितना एक सीधा पत्ता। किराना हो, कपड़े हों या मसाला—मालिक पीले कागज पर नाम, रकम और तारीख लिख देता है। बस, काम खत्म। यहाँ कंप्यूटर आया, पर हाथ की लिखाई गई नहीं। इसका राज सीधा सा है: पत्ता तुरंत समझ आता है, बदलना आसान है, और आदमी से आदमी का रिश्ता भी दिखाता है। एक पंक्ति में उधार भी, आज का सामान भी, और कल का भरोसा भी। घणी बार दुकान के बाहर खड़े ग्राहक को बस एक नज़र चाहिए होती है—और वही काम हाथ से लिखी लेद कर देती है। जयपुर की इस आदत में थोड़ा पुराना हिसाब है, थोड़ा नया विश्वास।