जयपुर की कचौरी: हर मोहल्ले का अलग शौक
जयपुर की सुबह कचौरी की खुशबू से पहचानी जाती है। पर यहाँ एक ही कचौरी सबको राज़ी नहीं करती। सी-स्कीम में प्याज़ वाली का अपना चस्का है, जबकि पुराने इलाकों में दाल वाली कचौरी के बिना चाय अधूरी लगती है। मोहल्ला बदलो, पसंद भी बदल जाती है — यही जयपुर का अपना इंतज़ाम है। घणी बात सीधी है: कचौरी यहाँ स्वाद से ज़्यादा आदत बन जाती है। कोई एक दुकान के तेल को सही मानते हैं, कोई भरावन को। और जब दो दोस्त अलग-अलग ठेले का नाम लेते हैं, तो बात बस खाने पर रुकती नहीं — वह इलाके की याद, सुबह के रास्ते, और बचपन के ठेले तक पहुँच जाती है। जयपुर में कचौरी का नक्शा कागज़ पर नहीं, ज़ुबान पर बनता है।
