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जयपुर की कचौरी: सुबह का नियम

Jaipur ki kachori: subah ka niyam

सुबह के सात बजे से पहले ही जयपुर के प्याज कचौरी काउंटरों पर भीड़ लगने लगती है। कोई साइकिल पर, कोई स्कूटी पर, कोई पैदल — पर सबका एक ही काम: कचौरी और चाय। यह सिर्फ भूख का मामला नहीं, एक रोज़ मिलने-जुलने का समय है। दुकान के आगे खड़े लोग, गरम तेल की खुशबू, और पहली चाय का घूंट — बस, सुबह तय। जयपुर में कचौरी के साथ चाय आना लगभग नियम जैसा है। तीखी भरी कचौरी को चाय से संभालना, और फिर उँगलियों से मिल-बाँटकर खाना — यही तो शहर की सीधी-सादी आदत है। म्हारे यहाँ सुबह का स्वाद थाली में नहीं, लाइन में मिलता है। और इसी लिए जयपुर की कचौरी नाश्ता कम, रोज़ का रिवाज ज़्यादा लगती है।