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जयपुर की सुबह का असली हीरो: प्याज़ कचौरी

Jaipur ki subah ka asli hero: pyaz kachori

जयपुर में सुबह का दृश्य अक्सर एक ही जगह पर बैठता है: प्याज़ ठेला। कचौरी तलती है, तेल में छोटी-छोटी आवाज़ आती है, और कतार धीरे-धीरे लंबी होती जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चे, दफ्तर के आदमी, और साइकिल पर आया मोची — सब एक ही प्लेट के चक्कर में। इस नाश्ते का मज़ा सिर्फ कचौरी में नहीं, उसके साथ वाली बात में है: धनिया की चटनी, थोड़ा-सा लाल मसाला, और गरम चाय का गिलास। घणी सच्ची बात यह है कि जयपुर वाला नाश्ता पेट भरने के साथ दिन को भी जगा देता है। और हाँ, जिस आदमी ने 7 कचौरी खाई थी, उसने बाद में कहा — “भूख थी, और प्याज़ ठेले ने रोक लिया।”