जल महल के बत्तख, पर्यटकों का स्लो-मो
जल महल के पास सुबह का नज़ारा बिलकुल अलग होता है। एक तरफ बत्तखें पानी पर ऐसी फुर्ती से चलती हैं जैसे उनके पैरों में छोटी-सी घड़ी लगी हो। दूसरी तरफ पर्यटक कैमरा उठाए, एक कदम आगे, दो कदम पीछे, और फिर वही मशहूर सेल्फी का चक्कर। मज़ा तो तब आता है जब बत्तख सीधे किनारे से निकल जाती है और पर्यटक अभी तक फ़िल्टर चुन रहा होता है। जयपुर की इस झील पर गति-परीक्षा का नतीजा साफ है: पंख वाले पहले, फ़ोन वाले आख़िर में। बस यही जल महल का नया नियम है—पानी वही, लेकिन रफ़्तार दो अलग। घणी सच्ची बात, प्रकृति को जल्दी नहीं होती, और सेल्फी को कभी जल्दी नहीं।
