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कॉमिक कविComic Kavi

जल महल की खामोशी और हर तरफ हीरो

Jal Mahal ki khaamoshi aur hero sab taraf

जल महल को देखकर लगता है जैसे झील के बीच किसी ने दृश्य रोक दिया हो। एक तरफ नाव वाले नाम पुकारते, दूसरी तरफ सेल्फी लेने वाले कोण ढूँढते, और आसपास की आवाज मिलकर भी उस खामोशी को नहीं तोड़ पाती। महल खुद इतना चुप, जैसे सारा तमाशा उसके लिए नहीं, उसके सामने हो रहा हो। यही तो जयपुर का मजा है। गाड़ी, आवाज, हँसी, बुलाना — सब चल रहा, पर पानी के बीच खड़ा महल बिलकुल अलग दिखता है। अजी, असली दृश्य तो मछलियों का है: वे बिना ताली, बिना शोर, सबको देख रही हैं, जैसे मौन दर्शक। घणी भीड़ के बीच भी यह आराम वाली नज़र याद रह जाती है.