जंतर मंतर का घड़ीयाला जादू
जंतर मंतर में एक पतली सी छाया गिरती है, और जयपुर का समय अपनी चाल से चलने लगता है। ग्नोमन का काम सीधा है: धूप पड़ते ही छाया रेखा पर वक्त लिख देती है। यह कोई मोबाइल की स्क्रीन छूने वाला काम नहीं, पूरा पुराना जुगाड़ है—पर बिलकुल सही। यही तो मजा है, पधारो शहर जयपुर में; घर की छत पर भी घड़ी चल जाए, पर यह वाली घड़ी आसमान से बात करती है। सम्राट यंत्र जैसी रचना देखकर लगता है, म्हारे पुरखे गणित और धूप दोनों के बड़े खिलाड़ी थे। और जो 4:17 का नंबर निकलता है, वह कोई अंदाज़ा नहीं—इंजीनियर जैसी पक्की नाप है। सच्ची, समय भी यहाँ थोड़ा शर्माता हुआ लगता है।
