झालाना में तेंदुए का वीआईपी मूड
झालाना सफारी में सबसे ज्यादा मेहनत कैमरा नहीं, धैर्य करता है। गाड़ी धीरे चलती है, गाइड आँख और दूरबीन दोनों से झाड़ियों को नापता रहता है, और पर्यटक साँस भी धीरे लेते हैं। तभी एक तेंदुआ, बिल्कुल वीआईपी अंदाज़ में, पेड़ की छाया में ऐसे आता है जैसे कह रहा हो: शो मेरा, समय भी मेरा। मज़ा इसी बात का है कि यहाँ जंगल देखने आते हो, पर जंगल पहले तुम्हें देख लेता है। कभी एकदम से नज़र आ जाए, कभी घंटे निकल जाएँ। जयपुर का सफारी मिज़ाज भी कुछ ऐसा ही है — घणी उम्मीद, थोड़ी खामोशी, और एक शान से बैठा बिल्ली-जैसा मेहमान। सच्ची, झालाना में फोटो से ज़्यादा याद उस पल की रह जाती है जब तेंदुए ने नज़र उठाई और लाइन में खड़े सब लोग एक साथ चुप हो गए।
