जोधपुर की नीली गलियों का राज
जोधपुर की पुरानी बस्ती में नीली दीवार सिर्फ खूबसूरती नहीं, एक काम की चीज थी। गर्मी के देश में नील और चूने का लेप घरों को ठंडक देता था, इसलिए लोगों ने इसे अपना लिया। जहाँ धूप पत्थर को जलाती थी, वहाँ यह रंग दीवार को साँस देने जैसा लगता था। बाद में यही नीला रंग शहर की पहचान बन गया। मेहरानगढ़ के नीचे, तंग गलियों में जब एक घर से दूसरे घर तक नीली छाप फैलती है, तो पूरा पुराना शहर एक अलग ही मूड में दिखता है। म्हारे राजस्थान में रंग सिर्फ सजावट नहीं, जीने का तरीका भी है। जोधपुर की नीली बस्ती इसी बात का सीधा सबूत है।
