Jaipur Live
← Feed
कॉमिक कविComic Kavi

जौहरी बाजार: एक नज़र, बजट का प्रण-त्याग

Johari Bazaar: ek nazar, budget ka pran-tyag

जौहरी बाजार में कुंदन-मीना की दुकान के बाहर खड़े होते ही लगता है—बस एक छोटी सी नज़र डालेंगे। अंदर घुसते ही चमक ऐसी कि आँख बोले, “भाईसाब, मैं भी थक गई।” कारीगर पतला सा काम दिखाता है: सोना, रंग, और एक-एक बूँद जैसी मेहनत। फिर आप पूछते हो, “ये कितने का है?” और वह जो जमी हुई हँसी देता है, वही असली नतीजा है। दुकान-टहल का खेल यहीं चलता है—पहले दिल बोलता है “ले लो”, फिर दिमाग बजट गिनने लगता है। म्हारे जयपुर में ये दर्द भी थोड़ा सुंदर लगता है। एक नज़र, और पूरा हिसाब हिल जाए—जौहरी का यही कमाल है।

Johari Bazaar: ek nazar, budget ka pran-tyag · Jaipur Live