जौहरी बाजार का कुंदन, और हर अंगूठी की कहानी
जौहरी बाजार में कुंदन की चमक सिर्फ सोना नहीं, यादों का रंग भी होती है। छोटी-सी खिड़की के पीछे बैठे कारीगर पतली तार, जरी और चमकदार पट्टी से ऐसा काम करते हैं कि अंगूठी सीधी बाजार की नहीं, किसी परिवार की तिजोरी से निकली लगे। यहाँ लोग अंगूठी देखकर पहले नाप पूछते हैं, फिर कहानी। “इसमें दादी जैसी बात है,” कोई बोलता है, और दूसरा तुरंत रिश्ता जोड़ देता है। घणी बार ऐसा लगता है कि एक अंगूठी खरीदने आए थे, पर घर के सब लोग अलग-अलग ख्वाब चुन रहे हैं। जौहरी बाजार का यही मिजाज है, सच्ची — हर चमक के पीछे कोई न कोई पुरानी पहचान छुपी होती है।
