जौहरी बाजार की चूड़ी गली, कलाई का शृंगार
जौहरी बाजार की चूड़ी गली में सुबह से ही हाथ की बात चलती रहती है। दुकानों में काँच की चूड़ियाँ, लाख के कंगन और भारी सेट एक के ऊपर एक चमक रहे होते हैं। शादी से पहले दुल्हन का शृंगार यहीं से होता है, और कई बार सास, ननद और सहेलियाँ मिलकर आख़िरी चुनाव करवाती हैं। भाईसाहब, यहाँ रंग सिर्फ रंग नहीं होता — लाल, हरा, कचनी और कुंदन जैसी चमक पूरी तैयारी का माहौल बना देती है। एक सेट मिल जाए तो पहनावा सीधा पूरा लगता है। पर उस लड़की ने लाल चूड़ियाँ इसलिए वापस रख दीं, क्योंकि उसे अपनी माँ की पुरानी कंगन वाली जोड़ी जोड़नी थी। जौहरी बाजार में स्टाइल से ज़्यादा याद जुड़ी होती है।
