जौहरी बाजार की पान-साधा वाली सुलह
जौहरी बाजार में खरीदारी का असली अंत बिलिंग काउंटर नहीं, पान की थैली होती है। कपड़े, चूड़ी, या चाँदी — सब खरीद लो, पर रास्ता तभी पूरा लगता है जब पान-साधा का लाल रंग होंठों पर आ जाए। पहले दो लोग दाम पर भिड़ते हैं, फिर पान वाले की एक छोटी सी पिचकारी सबको शांत कर देती है। मिठास इतनी कि भाई-साहब की तीखी बात भी नरम पड़ जाए। सुपारी की हल्की कुरकुराहट, सौंफ की खुशबू, और घूमती भीड़ के बीच वह एक छोटा सा जयपुर-सुलह। पधारो के बाजार में यही तो कमाल है — खरीदारी के बाद भी बात बची रहती है, पर झगड़ा नहीं।
