जौहरी बाजार की थाली, लाख और चांदी का रीत
जौहरी बाजार में थाली पर चांदी की चमक और लाख की मिठास साथ-साथ दिखती है। एक तरफ सुनार की नज़ाकत, दूसरी तरफ हाथ से बनी चूड़ियों का रंग—बस यही जयपुर की पहचान बन गया है। शादी हो या तीज, लोग यहाँ से चीज़ से ज़्यादा याद ले जाते हैं। दुकान के बाहर खड़ी औरतें कभी मोटी लाख चुन रही होती हैं, कभी पतली चांदी की कड़ी। घणी बार एक ही सवाल घूमता है: “वह वाली जो रोज़ पहनी जा सके?” इसी लिए यह थाली रीत लगती है—क्योंकि यह सिर्फ सजावट नहीं, रोज़ का पहनावा और घर की पहचान दोनों है। जयपुर में कुछ चीज़ें फैशन नहीं, आदत बन जाती हैं।
