जौहरी बाजार में चाँदी की काली सियासत
जौहरी बाजार में चाँदी का असली दुश्मन धूप नहीं, हवा और रोज़ का पहनना है। पॉलिश की हुई चूड़ियाँ सुबह चमकती हैं, शाम तक थोड़ी मुरझा-सी जाती हैं, और अगले हफ्ते कालेपन का नया नक्शा बना देती हैं। इसलिए यहाँ पॉलिश कराने वाले और बेचने वाले दोनों की अपनी छोटी-सी राजनीति चलती रहती है: कौन-सा कपड़ा, कौन-सा पाउडर, कौन-सी रगड़। भई, एक कारीगर ने कहा—“चाँदी को भी जयपुर की आदत लग गई है, थोड़ी देर चमके बिना मन ही नहीं मानता।” म्हारे यहाँ यह सिर्फ सफ़ाई का काम नहीं, इज़्ज़त का चक्कर है। जो चूड़ियाँ काली पड़ने पर भी टिक जाएँ, वही असली जौहरी का सवाल है।
