जोहरी बाज़ार में कपड़ा यार्ड से
जोहरी बाज़ार में हाथ से छपी छपाई देखने का मज़ा तब आता है जब कपड़ा थान में लिपटा हो और दुकानदार मीटर नहीं, यार्ड में नापने लगे। पहले रंग, फिर चाय, फिर थोड़ा सा मोल-भाव — यही तो जयपुर का पूरा सौदा है। भाईसाब, यहाँ लोग एक या दो पीस नहीं, पूरा कपड़ा लेते हैं, क्योंकि ब्लाउज, कुर्ता, दुपट्टा और घर के कपड़े सब कुछ एक ही छपाई से निकल आता है। इस बाज़ार की खास बात यह है कि खरीदारी का तरीका भी पुराना है और आदत भी। 12 यार्ड, 8 यार्ड, 6 यार्ड — जितना काम, उतना नाप। इसी लिए जोहरी बाज़ार में कपड़ा सिर्फ चीज़ नहीं, योजना होता है। और जब कोई बोलता है, “म्हारे को थान भर छपाई चाहिए,” तब समझ लो जयपुर अब भी यार्ड में सोचता है.
