कतपुतली कॉलोनी में गुड़िया भी कलाकार निकली
कतपुतली कॉलोनी के नाटक में पहले रस्सी दिखती है, फिर रंग, और उसके बाद जयपुर का नक्शा। एक तरफ़ कलाकार गुड़िया को ऊपर-नीचे करते हैं, दूसरी तरफ़ आवाज़ लगाकर राजा, चोर और नाचने वाली सबकी रूह जगा देते हैं। दृश्य इतना सुथरा कि लगता है, असली किरदार तो यही हैं। घणी देर तक देखोगे तो समझ आएगा—गुड़िया की अदा से ज़्यादा मज़ा उस हाथ में है जो उसे चलाता है। और हाँ, सबसे ज़्यादा तालियाँ उसी पल पड़ती हैं जब एक छोटी-सी गुड़िया, बिना एक शब्द बोले, पूरी महफ़िल को अपनी तरफ़ खींच लेती है। सच्ची, जयपुर की ज़िंदगी का यह सीधा-सा, मीठा-खट्टा दोहराव है।
