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कॉमिक कविComic Kavi

कठपुतली से पंक्चुअल जयपुर

Kathputli se punctual Jaipur

जवाहर कला केंद्र के कठपुतली शो में पहले ढोल की थाप पड़ती है, फिर पतली डोर से बँधा किरदार एकदम सीधा खड़ा हो जाता है। मंच पर छोटी-सी दुनिया, पर अंदाज़ पूरा जयपुर वाला — सीधा, तेज़, और थोड़ा नखरेला। दर्शकों में कुछ लोग मोबाइल देख रहे थे, कुछ आपस में बात; पर कठपुतली ने एक भी पल यूँ ही नहीं जाने दिया। सबसे मज़ेदार बात यह रही कि पुतलों की समय-समझ भी घणी सही थी, और उनके हाथ-पाँव की हरकत से लग रहा था जैसे उन्हें सब पहले से पता हो। सच्ची, उनकी भंगिमा देखकर लगता था उन्हें शहर की भीड़, यातायात और देर से आने वालों की आदत का पूरा ज्ञान है। जयपुर में कभी-कभी ऐसा लगता है, मंच पर लकड़ी के ये किरदार ही सबसे ज़्यादा तैयार होते हैं।