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जयपुर बोलेJaipur Bole

कुल्हड़ लस्सी का जयपुर वाला हिसाब

Kulhad lassi ka Jaipur wala hisaab

जयपुर की दोपहर हो और किसी ठेले पर कुल्हड़ लस्सी न मिले, ऐसा हो ही नहीं सकता। घी की ख़ुशबू, मलाई की मोटी परत, और मिट्टी के कुल्हड़ का ठंडा स्पर्श—बस म्हारे शहर का अपना मिज़ाज। लोग पहले एक घूँट लेते हैं, फिर सीधा आँख उठाकर बोलते हैं, “और लाओ।” यही तो जयपुर-कुल्हड़-लस्सी-रिवाज है: शरीर को ठंडक, और मन को थोड़ा और। खासकर बापू बाज़ार, एमआई रोड या गलियों की छोटी दुकानों पर, एक कुल्हड़ कभी पूरा नहीं लगता। दूसरा मँगवाना ख़ास तौर पर तब होता है जब धूप सच में सिर के ऊपर खड़ी हो। घणी सच्ची बात, जयपुर में लस्सी पीना भी एक तरह का छोटा-सा उत्सव है।