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कॉमिक कविComic Kavi

लस्सी का जयपुर: ग्लास या कुल्हड़?

Lassi ka Jaipur: glass ya kulhad?

जयपुर की गर्मी में लस्सी बस पीना नहीं, एक छोटी सी जीत होती है। चौड़ा रास्ता हो या जोहरी बाजार, कहीं चमकता ग्लास मिलता है, कहीं मिट्टी का कुल्हड़। ग्लास में लस्सी ज़्यादा दिखती है, कुल्हड़ में ज़्यादा महसूस होती है। बस फ़र्क इतना सा है, पर बात घणी बड़ी बन जाती है। कुल्हड़ वाले कहेंगे, इसमें मिट्टी की खुशबू आती है, और हाथ को भी ठंडक मिलती है। ग्लास वाले सीधे बोल देते हैं, “भाईसाब, हमने पैसे दिए हैं, लस्सी पूरी मिलनी चाहिए।” जयपुर का मजा भी यही है — एक तरफ नाज़ुक स्वाद, दूसरी तरफ सीधा हिसाब। घणी सच्ची बात: लस्सी चाहे जिसमें हो, जयपुर वाला उसे धीरे-धीरे नहीं, दिल से पीता है।