मसाला छाछ ने शादी को ठंडा कर दिया
पंडाल में दुपट्टा सँभालते लोग, और पसीने से भीगे हुए रिश्तेदार — जयपुर की गर्मी ने सबको एक जैसा कर दिया। तभी एक थाल में मसाला छाछ के गिलास आए: जीरा, काला नमक और थोड़ी सी हरी मिर्च की खुशबू। एक घूँट लिया और चेहरे खिल गए। शादी का शोर था, पर घणी ठंडक इसी गिलास में थी। म्हारे यहाँ बोलते हैं, ‘छाछ पीयो, ताप कम करो।’ और सच भी यही है — जब बात खाने, गर्मी और थोड़ी-सी परिवार की तनातनी की हो, मसाला छाछ बिना बोले सब सँभाल लेती है। न ढोल की ज़रूरत, न समझाने की। बस एक गिलास, और मन सीधा सेट।
