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कॉमिक कविComic Kavi

पान बाजार की रात, छुपी गपशप

Paan Bazar ki Raat, Chhupi Gupshup

पान बाजार में शाम के बाद दुकानों की शटर एक-एक करके नीचे आती है, पर गली का मिज़ाज ऊपर चढ़ जाता है। एक तरफ पान की खुशबू, दूसरी तरफ चाय की भाप, और बीच में दो-तीन लोग कुर्सी टिकाकर बैठ जाते हैं। यहीं से बात निकलती है—किसने नए जूते लिए, किसकी साइकिल का टायर ढीला, और कौन कल सुबह जल्दी निकलेगा। जयपुर में बाजार बंद हो सकता है, पर गपशप की व्यवस्था कभी बंद नहीं होती। पान बाजार की रात इसी लिए प्यारी लगती है: काम खत्म, पर शहर का दिल अब भी धड़क रहा होता है। सच्ची, घणी ठंडी हवा में भी ये गलियाँ गरम रहती हैं।