पान की दुकान: एक मिनट का राजस्थान
पान की दुकान जयपुर की असली इंतज़ार-गृह है। एक बंदा पान माँगता है, दूसरा सौंफ लेता है, तीसरा बस “एक मिनट” बोलकर खड़ा हो जाता है। फिर चाय नहीं, सीधे बात चलती है—गली का नया किराया, स्कूल का नतीजा, और कौन सी दुकान पर बढ़िया गुलकंद मिलती है। म्हारे यहाँ एक मिनट का हिसाब घड़ी से नहीं, बात के अंत से होता है। मोड़ तब आता है जब कोई जाने का नाम ही नहीं लेता। भराव खत्म, पान पत्ता खत्म, पर अड्डा नहीं खत्म। ऑटो वाला पाँच बार हॉर्न बजाकर थक जाता है, और सामने वाला बोलता है, “बस अभी निकला।” जयपुर का ये छोटा सा चक्कर ही तो है—जहाँ समय नहीं, रिश्ता टिकता है।
