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कॉमिक कविComic Kavi

पान ठेला: जयपुर की शाम की संसद

Paan thela: Jaipur ki shaam ki parliament

पान का ठेला जयपुर में सिर्फ ठेला नहीं, शाम की छोटी सी संसद है। रात के खाने के बाद लोग वहीं आकर खड़े हो जाते हैं—कोई मीठा पान, कोई सादा, कोई बस खुशबू के लिए। ठेले वाले के हाथ तेज, और सुनहरी बातों के बीच पुदीने की ठंडी थपक। यहीं पर रिश्तों की गर्मी निकलती है: घर की बात, गली की खबर, और दफ्तर वाली थकान एक ही पत्ते पर बैठ जाती है। कोई किसी को पान खिलाता है, कोई अपनी जीभ पर लाल निशान छुपा कर घर जाता है। जयपुर में यही तो कमाल है—बात छोटी हो या बड़ी, ठेले पर आकर घणी बड़ी लगने लगती है। सच्ची, इस शहर की रात कभी चाय से नहीं, पान से लिपटी मिलती है।