पांच बत्ती की पूरी या कचौरी की चचेरी बहन?
पांच बत्ती के किनारे एक ठेले पर पूरी आई तो लोगों ने पहले आकार देखा, फिर रंग, फिर उसकी थोड़ी सी टेढ़ी चाल। जयपुर में खाने की चीज़ों का भी अपना जासूसी काम चलता है — पूरी सीधी है या कचौरी के पास वाली रिश्तेदार? इस वाली का जवाब उसके बीच के भरे हुए मसाले ने दिया। कैसे? प्लेट पर रखी तो ऊपर से पूरी जैसी, पर काटने पर अंदर से ऐसे निकली जैसे कचौरी ने भी आज हल्का सा रूप बदल लिया हो। सच्ची, पांच बत्ती की रोशनी में ऐसी चीज़ों का इम्तिहान अलग ही होता है। और जयपुर वाला भी कम नहीं — एक ही कौर में फैसला, और अगले कौर में याद, घणी बढ़िया थी।
