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कॉमिक कविComic Kavi

पच्चीस बत्ती की गली का धैर्य टेस्ट

Pachees Batti ki gully ka patience test

पच्चीस बत्ती की गली में सुबह से शाम तक एक ही दृश्य चलता है: गाड़ी बस थोड़ी सी आगे, फिर रुक। छत की दीवार जितनी तंग राह, और उस पर भी स्कूटर, साइकिल, ऑटो, सब अपनी जगह का हिसाब माँगते। जयपुर वाले फिर भी घणी शांति से खड़े रहते, जैसे धैर्य का असली कागज़ यहीं लिखा जाता हो। पर असली मज़ा तो उस आदमी में था जो लगातार हॉर्न बजने पर भी मुस्कुरा दिया। बाद में पता चला, उसकी कार के आगे एक डिलीवरी वैन अटकी थी और उसने कहा, “भाईसाब, दो मिनट का काम है।” वे दो मिनट, पच्चीस बत्ती की गली में पूरा माहौल बदल देते हैं। सच्ची, इस गली में ट्रैफिक कम और सब्र ज़्यादा दिखाई देता है।