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कॉमिक कविComic Kavi

पचरंगा अचार: घर की असली शांति-संधि

Pachranga achar: ghar ki asli peace treaty

जयपुर के घर में dinner शुरू होते ही दाल गरम होती है, रोटी फुलती है, और राय भी। कोई कहता है नमक कम है, कोई बोलता है घी ज़्यादा, और म्हारे यहाँ तो हर थाली में एक छोटी सी बहस पक्की। तब पचरंगा अचार की डिब्बी आती है—जैसे खाने के बीच नहीं, सीधे घर की बात-चीत में उतर आई हो। एक चम्मच अचार दाल पर, एक रोटी पर, और देखो भैया, सबकी आवाज़ नरम। इसमें कोई लड़ाई नहीं जीताता, बस दिन भर की थकान को थोड़ा खट्टा-मीठा कर देता है। जयपुर की घणी सीधी बात है: जब अचार ठीक हो, तो खाना भी, और घर का माहौल भी।