पंच बत्ती: जयपुर का ग्रुप चैट
पंच बत्ती पर सिग्नल के तीनों रंग ऐसे चमकते हैं जैसे जयपुर का ग्रुप चैट बिना म्यूट के चल रहा हो। लाल बत्ती पर गाड़ियाँ रुकती हैं, पर हॉर्न नहीं रुकता; पीला आते ही सबको लगता है बस एक सेकंड और। हर स्कूटर वाला, हर ऑटो, हर कार — सब अपनी बात “अभी” के मूड में। फिर हरा होता है और शहर का जवाब एक साथ आता है: भाइसाहब, अब दौड़ शुरू। यहीं असली नाटक है — कौन पहले निकला, कौन थोड़ा सा देर से हुआ, और कौन चhat ki diwar जैसा सीधा बीच में अटका रहा। पंच बत्ती का सिग्नल यातायात-दीप कम, जयपुर की रोज़ की बातचीत ज़्यादा लगता है। घणी सच्ची बात, यह छोटा सा कोना पूरे शहर का मिज़ाज बता देता है।
