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कॉमिक कविComic Kavi

पंच बत्ती की चाय और चार बातें

Panch Batti ki chai aur chaar baatein

पंच बत्ती की चाय का अपना ही राग है। गरम कुल्हड़, टपकती पत्ती, और कुर्सी पर बैठा हर आदमी एक्सपर्ट लगता है। एक कहता, “चाय थोड़ी तेज़ है,” दूसरा तुरंत बोलता, “नहीं, आज तो कड़क सही बनी।” इसी बीच स्टॉल वाला बिना पूछे बिस्किट रख देता है, जैसे जयपुर में मेहमान को नहीं, ओपिनियन को सर्व कर रहा हो। यही इस जगह की मस्ती है—चाय से ज़्यादा चाय के साथ चलती बात। म्हारे जयपुर में पंच बत्ती पर रुकना सिर्फ थकान उतारना नहीं, थोड़ा शहर सुनना भी है। और सच्ची, जो एक्स्ट्रा बिस्किट मिलता है न, वो कभी बिल में नहीं, यादों में गिनता है.