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कॉमिक कविComic Kavi

पंच बत्ती पर inner peace का टेस्ट

Panch Batti par inner peace ka test

पंच बत्ती पर सुबह से शाम तक एक ही सीख मिलती है: रास्ता कम, सब्र ज़्यादा। गाड़ियाँ गोल-गोल घूमती हैं, पर चालक का ध्यान सीधा रहना चाहिए। एक तरफ़ स्कूटी की छोटी-सी जगह, दूसरी तरफ़ बस का भारी मिज़ाज, और बीच में जयपुर वाला सोचता है—“थोड़ी-सी लेन मेरी भी है।” यहीं हॉर्न रोकने का असली पाठ है। जो बिना हॉर्न के निकल गया, वह संत महात्मा नहीं, बस थोड़ा समझदार निकला। और आँखों से आँख बचाकर चलना? भाईसाहब, वह भी एक कला है। पंच बत्ती सिखाती है कि inner peace कभी ध्यान से नहीं, यातायात से मिलता है। घणी सच्ची बात है—जो इस गोल चक्कर को हँसकर पार कर ले, उसका दिन पक्का सेट।