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कॉमिक कविComic Kavi

पंगट की लाइन और जयपुर की ट्रेनिंग

Panghat ki line aur Jaipur ki training

पंगट के पास सुबह का नज़ारा अलग ही होता है: एक हाथ में घड़ा, दूसरे में सब्र। पानी से पहले लाइन चलती है, फिर आँखों का इशारा, और फिर छोटी सी बात का पूरा बाज़ार। जयपुर की गलियों में ऐसे ही लोग एक-दूसरे को बिना बोले समझ लेते हैं। चूड़ियों की खनक कब आएगी, बाल्टी का किनारा कहाँ टिकना है, और किसकी बारी कब आएगी — यह सब यहाँ “प्रशिक्षण” में नहीं, रोज़ के नुस्खे में सिखाया जाता है। सुषीला बाई ने आज भी घड़ा भरते-भरते पूरा हिसाब सुना दिया, क्योंकि उनके हिसाब से पंगट पर सब्र और गपशप दोनों का कोटा बराबर चलता है। सच्ची, जयपुर का कतार-व्यवस्था भी घणी कमाल की है।