पन्ना मीना का कुंड: हाँ भी शायरी
पन्ना मीना का कुंड की सीढ़ियाँ बस नीचे-उतरने का रास्ता नहीं, सुनने का भी कमाल दिखाती हैं। एक कोने से हल्का सा ‘हाँ’ निकालो, तो आवाज़ सीढ़ियों से टकरा कर वापस आती है, जैसे किसी ने बात को ढंग से सजा दिया हो। फिर लगता है, जयपुर में हर सीढ़ी के पास अपना एक छोटा सा मज़ाक है। यही इसका असली जादू है: खुली जगह, गहराई, और पत्थर की दीवारों का हिसाब। इसी लिए आम सी बात भी घणी ख़ास सुनाई देती है। म्हारे यहाँ कोई बोले, ‘ठीक है,’ तो वह भी थोड़ा कविता बन कर लौट आता है। पधारो, बस धीरे बोलना — वरना कुंड खुद आपकी आवाज़ का जवाब दे देगा.
