पन्ना मीना के सीढ़ी और सेल्फी का झुंड
पन्ना मीना का कुण्ड देखने जाओ तो पहले सीढ़ियाँ नज़र आती हैं, फिर उन पर चढ़ी भीड़। एक सीढ़ी, दो सीढ़ी, और बस — आदमी सोचता है कि जयपुर ने ज्यामिति को ही घूमने की जगह बना दिया। हर कोने से फोटो, हर कोण से पोज़, और हर बंदे के चेहरे पर वही सवाल: “मेरा फ्रेम सीधा आया क्या?” इस सममिति का कमाल यही है कि लोग खुद लाइन बना लेते हैं। जहाँ गार्ड को समझाना पड़े, वहाँ यहाँ लोग खुद ही रुक-रुक कर फोटो खिंचवाते हैं। घणी मज़ेदार बात ये है कि जो सीढ़ियाँ कभी पानी सँभालने के काम आती होंगी, आज वो भीड़ सँभाल रही हैं। सच्ची, जयपुर की वास्तुकला में भी भीड़-नियंत्रण का जुगाड़ मिल जाता है।
