पत्रिका गेट: 12 कोण, 1 दोस्त तिपाई
पत्रिका गेट के पास फोटो खिंचवाना सीधा काम नहीं, पूरा व्यायाम है। पहले एक कदम बाईं तरफ, फिर दो कदम आगे, फिर “थोड़ा और नीचे से” वाला निर्देश। स्मारक एक ही, पर मुद्रा बारह। सबसे बड़ी मेहनत उस दोस्त की होती है जो कैमरा पकड़कर खड़ा रहता है और धीरे-धीरे तिपाई में बदल जाता है। घणी देर तक बस इतना सुनाई देता है—“एक और,” “बस अभी,” “नहीं, इस कोण में ज़्यादा अच्छा लगेगा।” जयपुर का यह दृश्य बड़ा सच्चा है: यादगार फोटो के लिए सबसे ज़्यादा सब्र, और सबसे कम शिकायत, वही दोस्त करता है जो फ्रेम के बाहर रह जाता है।
