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कॉमिक कविComic Kavi

पत्रिका गेट पर 12 पोज, 1 आर्च, 0 धैर्य

Patrika Gate par 12 pose, 1 arch, 0 patience

पत्रिका गेट पर शादी का शूट हो और फ़ोटोग्राफ़र चुप रहे, ऐसा जयपुर में कभी नहीं होता। पहले जोड़ा सीधा खड़ा, फिर हाथ पकड़ो, फिर नज़र उठाओ, फिर थोड़ा घूमो — और आर्च के नीचे वही एक चित्र बार-बार नया बन जाता है। गेट की रंग-बिरंगी दीवारों के सामने सबको लगता है कि फोटो में बस खुशी चाहिए, पर कैमरा वाले को तो यातायात-प्रहरी जैसी नज़र और कवि जैसी समय-समझ चाहिए। घणी देर तक पोज देकर दुल्हन की मुस्कान पक्की, दूल्हे का धैर्य हल्की सी धूल। और जयपुर? वह बस साइड में खड़ा बोलता है: “एक और शॉट, फिर घर।”