पिछवाई की खामोश डेडलाइन
नाथद्वारा में पिछवाई का काम देखोगे तो लगेगा जैसे दीवार पर पहले तैयारी हो रही हो, और देवता बाद में पधारेंगे। रेशम पर पीला, हरा, सफेद रंग चढ़ते जाते हैं, और चित्रकार बस आँखों से नापता रहता है। इधर चाँद का निशान, उधर फूल की पत्ती—सब कुछ घणी सुकून भरी शांति में। पर इस शांति के पीछे एक सख्त डेडलाइन होती है: आरती से पहले पिछवाई तैयार। इसी लिए कलम, कपड़ा और रोशनी मिलकर पर्दे के पीछे का ड्रामा बना देते हैं। म्हारे राजस्थान में भक्ति कभी शोर नहीं करती; कभी-कभी वह बस एक ब्रश-स्टोक में साँस लेती है।
