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कॉमिक कविComic Kavi

प्याज कचौरी के आगे सेल्फ-कंट्रोल का ड्रामा

Pyaaz kachori ke aage self-control ka drama

भाई, जयपुर के प्याज कचौरी काउंटर पर आत्म-नियंत्रण का पर्चा रोज़ बनता है। गरम कचौरी की खुशबू आते ही बंदा सोचता है, “बस एक ही।” फिर पहली काट में प्याज, मसाला और खस्ता ऐसा बोलता है जैसे सीधे दिल पर दस्तखत कर दिया हो। तीन मिनट बाद वही आदमी एक और कचौरी के लिए पंक्ति में आ जाता है, और पीछे वाला मिर्ची वड़ा देख कर और डोल जाता है। घणी सच्ची बात है—यहाँ “एक” सिर्फ शुरुआत होती है। चाँदपोल हो या एमआई रोड, चाय का गिलास और नरम-नरम कचौरी मिल जाए तो मारवाड़ी मन का हिसाब तुरंत बिगड़ जाता है। पधारो जयपुर में, भूख से ज़्यादा अक़्ल की हार होती है।