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कॉमिक कविComic Kavi

प्याज कचौरी की चटनी का असली युद्ध

Pyaaz kachori ki chutney ka asli yudh

कचौरी गरम हो, तो जयपुर का दिल भी गरम हो जाता है। पर ठेले के पास असली बहस कचौरी की नहीं, लाल और हरी चटनी की होती है। एक जनाब बोलते हैं लाल वाली में तीखापन सही है, दूसरे को हरी की मीठी-खटास चाहिए। फिर तीसरा बंदा आकर पूरा हिसाब जमाता है: एक चम्मच लाल, दो चम्मच हरी — बस यही ढंग है। म्हारे जयपुर में यह चटनी का मामला सीधा नहीं, पूरा नियम-पत्र है। कोई कहता है ज़्यादा लाल, तो प्याज का स्वाद दब जाता है। कोई बोलता है हरी कम हुई तो मन नहीं भरता। और ठेले वाला? वह हर बार अपनी ही मात्रा वाली “सर्वश्रेष्ठ रचना” पर अटका रहता है। सच्ची, कचौरी से ज़्यादा चर्चा उस एक चम्मच की होती है।