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प्याज़ कचौरी की लाइन और सुबह का राज

Pyaaz kachori ki line aur subah ka raaz

सुबह जैसे ही बाज़ार खुलता है, प्याज़ कचौरी की दुकान के बाहर लाइन बन जाती है। कोई दफ़्तर से पहले आया है, कोई स्कूल छोड़ने के बाद, और कोई बस इसलिए कि गरम कचौरी का पहला बैच मिल जाए। जयपुर में सच्ची बात ये है: जो कचौरी सबसे ज़्यादा ढंग से भरी होती है, वह सबसे पहले ख़त्म होती है। दुकानदार का हाथ तेज़, तेल ठीक गरम, और प्याज़ की खुशबू पूरी गली को पकड़ लेती है। घणी देर नहीं लगती — 11 बजे तक ट्रे आधी। इसी वजह से लोग 9 बजे ही लाइन में लग जाते हैं। म्हारे जयपुर की यही तो आदत है: स्वाद के सामने सब्र भी सुबह का ही होता है।