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कॉमिक कविComic Kavi

रावत की लाइन ने सबको दर्शन सिखा दिए

Rawat ki line ne sabko darshan sikha diye

रावत के बाहर सुबह से ही लाइन लग जाए, तो जयपुर का मिज़ाज भी थोड़ा सीधा हो जाता है। न कोई हॉर्न का फायदा, न कोई “बस दो मिनट” की अकड़। सब खड़े रहते हैं, कचोरी की खुशबू को देख नहीं, महसूस करके। फिर समझ आता है कि सब्र कोई किताब की बात नहीं, भूख का असली पाठ है। घणी देर तक खड़े रहने के बाद आदमी दो चीज़ें सीखता है: पहली, कचोरी की क़दर; दूसरी, अपनी बारी का सम्मान। और हाँ, लाइन में खड़ा जयपुर वाला भाईसाब कभी चिल्लाता नहीं—बस आँखों से पूछ लेता है, “भाई, अब मेरा नंबर?”