रावत की लाइन ने सिखाया सब्र का ज्ञान
रावत के बाहर सुबह की लाइन देख लो, जयपुर का असली सबक मिल जाता है। पहले आदमी फोन निकालता है, फिर जेब में हाथ डालकर खुद को तसल्ली देता है। दूसरा चाय की ठेली से लौटकर बोलता है, ‘बस दो मिनट और।’ पर ये दो मिनट कभी दो ही रहते कहाँ हैं? फिर लाइन धीरे-धीरे स्कूल की सभा जैसी अनुशासन पकड़ लेती है। आगे वाला बिना बोले आगे बढ़ता है, पीछे वाला बिना शिकायत खड़ा रहता है। म्हारे यहाँ कचोरी सिर्फ नाश्ता नहीं, सब्र का व्यवहारिक पाठ है। और जो बंदा सबसे पहले बोलता है, ‘बस एक प्लेट,’ वही आखिर में दूसरी प्लेट भी ले लेता है। जयपुर ने सिखाया है: भूख तेज हो सकती है, पर लाइन का मन और भी तेज होता है।
